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भूटान ने राष्ट्रीय भंडार से $11.8 मिलियन के बिटकॉइन स्थानांतरित किए, बाजार में बढ़ी चर्चा

भूटान ने अपने राष्ट्रीय भंडार से $11.8 मिलियन के बिटकॉइन स्थानांतरित किए। ब्लॉकचेन डेटा के अनुसार देश सक्रिय रूप से अपने BTC भंडार का प्रबंधन कर रहा है।

भूटान ने राष्ट्रीय भंडार से $11.8 मिलियन के बिटकॉइन स्थानांतरित किए, बाजार में बढ़ी चर्चा
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हिमालयी देश भूटान ने अपने राष्ट्रीय बिटकॉइन भंडार से लगभग $11.8 मिलियन मूल्य के बिटकॉइन स्थानांतरित किए हैं। ब्लॉकचेन विश्लेषण प्लेटफॉर्म आर्कहम के अनुसार सरकार से जुड़े वॉलेट से यह ट्रांसफर हाल ही में किया गया, जिससे क्रिप्टो बाजार में भूटान की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

ब्लॉकचेन डेटा से पता चलता है कि भूटान ने अपने मुख्य होल्डिंग वॉलेट से लगभग 175 बिटकॉइन (BTC) एक नए पते पर भेजे। यह पता लगभग एक महीने पहले बनाया गया था और इससे पहले भी सरकार से जुड़े वॉलेट से बिटकॉइन प्राप्त कर चुका है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संभवतः रणनीतिक पुनर्विन्यास या संभावित बिक्री की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।

सरकार के क्रिप्टो भंडार पर नजर

भूटान उन देशों में शामिल है जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया है। आर्कहम के अनुमान के अनुसार देश के पास वर्तमान में लगभग 5,400 बिटकॉइन हैं, जिससे वह दुनिया के सबसे बड़े सरकारी बिटकॉइन धारकों में शामिल हो जाता है।

तुलना करें तो संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा सरकारी बिटकॉइन धारक माना जाता है, जिसके पास तीन लाख से अधिक बिटकॉइन हैं।

भूटान की क्रिप्टो रणनीति को उसके सरकारी निवेश कोष Druk Holding & Investments (DHI) द्वारा संचालित किया जाता है। यही संस्था देश के बिटकॉइन माइनिंग और डिजिटल संपत्ति निवेश कार्यक्रम की देखरेख करती है।

पहले भी हो चुकी है बिक्री

आर्कहम के अनुसार भूटान ने इससे पहले भी कई बार अपने बिटकॉइन भंडार का एक हिस्सा बाजार में बेचा है। उदाहरण के लिए फरवरी में देश ने लगभग $7 मिलियन मूल्य के बिटकॉइन बेचे थे।

ब्लॉकचेन डेटा से संकेत मिलता है कि भूटान अक्सर $5 से $10 मिलियन के छोटे हिस्सों में बिक्री करता है। यह तरीका सरकार को बाजार पर अधिक दबाव डाले बिना अपने भंडार का उपयोग करने की सुविधा देता है।

2025 के दौरान भी भूटान ने कई चरणों में बिटकॉइन की बिक्री की थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देश सक्रिय रूप से अपने क्रिप्टो भंडार का प्रबंधन करता है।

ऊर्जा से जुड़ा है भूटान का बिटकॉइन मॉडल

भूटान की क्रिप्टो रणनीति का एक बड़ा आधार उसका ऊर्जा संसाधन है। देश ने 2019 से राज्य समर्थित बिटकॉइन माइनिंग कार्यक्रम शुरू किया था, जो मुख्य रूप से जलविद्युत ऊर्जा पर आधारित है। भूटान के पास प्रचुर मात्रा में जलविद्युत क्षमता है, जिससे वह अपेक्षाकृत कम लागत पर माइनिंग कर सकता है। इस कारण सरकार ने डिजिटल संपत्तियों को राष्ट्रीय राजस्व के एक नए स्रोत के रूप में अपनाया है।

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हालांकि 2024 में बिटकॉइन माइनिंग रिवॉर्ड आधा होने के बाद इस उद्योग की लागत बढ़ गई। इसके चलते कई देशों की तरह भूटान को भी अपने माइनिंग मॉडल में बदलाव करना पड़ा।

सार्वजनिक सेवाओं में उपयोग

भूटान के नेताओं ने पहले भी कहा है कि क्रिप्टो माइनिंग से होने वाली आय का उपयोग देश में सार्वजनिक सेवाओं के लिए किया गया है। इसमें स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण परियोजनाओं और सरकारी कर्मचारियों के वेतन जैसी योजनाएं शामिल बताई गई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल दुनिया के अन्य देशों के लिए भी दिलचस्प उदाहरण बन सकता है, जहां सरकारें डिजिटल संपत्तियों को आर्थिक विकास के साधन के रूप में देख रही हैं।

बाजार पर संभावित असर

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हालिया ट्रांसफर का अंतिम उद्देश्य बिक्री है या केवल वॉलेट प्रबंधन। हालांकि क्रिप्टो बाजार में सरकारों की गतिविधि अक्सर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।

यदि भूटान वास्तव में अपने भंडार का हिस्सा बेचता है, तो यह अल्पकालिक बाजार भावना को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, यदि यह केवल तकनीकी स्थानांतरण है, तो इसका बाजार पर सीमित प्रभाव होगा।

बढ़ती सरकारी भागीदारी

भूटान का मामला यह भी दिखाता है कि क्रिप्टो अब केवल निजी निवेशकों तक सीमित नहीं रहा। दुनिया के कई देश बिटकॉइन और अन्य डिजिटल संपत्तियों को अपने वित्तीय ढांचे का हिस्सा बना रहे हैं।

भूटान की रणनीति खास इसलिए भी है क्योंकि उसने अपने प्राकृतिक ऊर्जा संसाधनों का उपयोग करके डिजिटल संपत्तियों का भंडार बनाया है।

फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर बनी हुई है कि आने वाले महीनों में भूटान अपने बिटकॉइन भंडार को कैसे प्रबंधित करता है और क्या यह रणनीति अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

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