
Ondo ने खोला Private Market, अब IPO से पहले AI कंपनियों में टोकन के जरिए निवेश
Ondo Finance ने Private Markets प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसके जरिए योग्य निवेशक IPO से पहले निजी AI कंपनियों में टोकनाइज्ड आर्थिक एक्सपोजर ले सकेंगे। जानिए 24 घंटे कारोबार और इस नए मॉडल की खासियत।

क्रिप्टो और पारंपरिक वित्तीय बाजार के बीच दूरी कम करने की कोशिश में Ondo Finance ने एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। कंपनी ने Ondo Private Markets नाम से ऐसी व्यवस्था शुरू की है, जिसके जरिए योग्य निवेशक उन निजी कंपनियों में निवेश का आर्थिक लाभ ले सकेंगे, जो अभी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं हुई हैं।
इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत एक अज्ञात प्री-IPO AI कंपनी से होगी। इसके बाद रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, बायोटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों की निजी कंपनियों से जुड़े उत्पाद लाने की योजना है। इन उत्पादों में निवेशक 24 घंटे कारोबार कर सकेंगे, हालांकि यह सुविधा योग्य और अमेरिका के बाहर स्थित निवेशकों के लिए है।
IPO से पहले निजी कंपनियों तक पहुंच
निजी कंपनियों में निवेश आमतौर पर बड़े संस्थागत निवेशकों और सीमित संख्या में योग्य निवेशकों तक रहता है। इसके अलावा ऐसे निवेश में पैसा लंबे समय तक फंसा रह सकता है, क्योंकि कंपनी के सार्वजनिक होने या किसी अन्य निकासी अवसर का इंतजार करना पड़ता है।
Ondo का नया प्लेटफॉर्म इसी समस्या को बदलने की कोशिश कर रहा है। कंपनी ऐसे टोकनाइज्ड नोट जारी करेगी, जिनका भुगतान किसी निजी कंपनी के सामान्य शेयर की कीमत से जुड़े परिणाम पर निर्भर करेगा। यानी निवेशक को कंपनी के शेयर का सीधा मालिकाना हक नहीं मिलेगा, लेकिन कंपनी के मूल्य में बढ़ोतरी का आर्थिक लाभ लेने का अवसर मिलेगा।
Ondo के मुताबिक, पहले उत्पाद में एक प्री-IPO AI कंपनी का आर्थिक प्रदर्शन टोकन के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। इन नोट्स की द्वितीयक बाजार में खरीद-बिक्री इस सप्ताह शुरू होने की उम्मीद है।
24 घंटे कारोबार की सुविधा
इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी लगातार कारोबार की सुविधा है। पारंपरिक निजी बाजारों में निवेशक आमतौर पर अपनी हिस्सेदारी तुरंत नहीं बेच सकते। Ondo Private Markets में योग्य निवेशक अपने टोकन को अपने वॉलेट में रख सकते हैं और द्वितीयक बाजार में किसी भी समय खरीद या बिक्री कर सकते हैं।
इससे निजी कंपनियों में निवेश की एक बड़ी समस्या, यानी कम तरलता, को कम करने की कोशिश की जा रही है। निवेशक किसी कंपनी के सार्वजनिक होने का इंतजार किए बिना अपनी स्थिति घटा या बढ़ा सकते हैं।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ये टोकन संबंधित कंपनी के वास्तविक शेयर नहीं हैं। इनमें शेयरधारक अधिकार या कंपनी के प्रबंधन में मतदान का अधिकार नहीं मिलता। यह मुख्य रूप से कंपनी के शेयर मूल्य से जुड़ा आर्थिक निवेश है।
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AI से शुरू, आगे कई सेक्टर पर नजर
Ondo ने इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत AI क्षेत्र से करने का फैसला किया है। इसकी वजह यह है कि AI से जुड़ी कई तेजी से बढ़ने वाली कंपनियां लंबे समय तक निजी रह रही हैं और सार्वजनिक बाजार में आने से पहले ही उनकी कीमत काफी बढ़ रही है।
कंपनी आगे रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, बायोटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों की निजी कंपनियों को भी इस व्यवस्था में शामिल करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य धीरे-धीरे निजी कंपनियों के लिए भी ऐसा बाजार तैयार करना है, जैसा Ondo ने सार्वजनिक शेयरों और ETF के लिए बनाया है।
Ondo के अनुसार, अमेरिका में $100 मिलियन से ज्यादा सालाना आय वाली करीब 87% कंपनियां अभी निजी हैं। इसका मतलब है कि सार्वजनिक शेयर बाजार में उपलब्ध कंपनियों के बाहर भी बड़ी संख्या में बड़े कारोबार मौजूद हैं।
Tokenization के बढ़ते बाजार में Ondo की अगली चाल
Ondo पहले ही टोकनाइज्ड शेयर और अमेरिकी ट्रेजरी जैसे वास्तविक संपत्तियों को ब्लॉकचेन पर लाने के क्षेत्र में बड़ा नाम बन चुका है। कंपनी के मुताबिक, उसके टोकनाइज्ड शेयर और ट्रेजरी प्लेटफॉर्म पर कुल लॉक्ड वैल्यू करीब $3.7 बिलियन है और अब तक 10 लाख से ज्यादा धारक जुड़ चुके हैं।
निजी कंपनियों तक इसी मॉडल को ले जाना टोकनाइजेशन बाजार के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस क्षेत्र में नियामकीय नियम, निवेशकों की पात्रता और निजी कंपनियों के वास्तविक मूल्यांकन जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी। अमेरिका में इन नए उत्पादों में निवेश की अनुमति नहीं है और इन्हें अमेरिकी निवेशकों को तब तक पेश नहीं किया जा सकता जब तक आवश्यक पंजीकरण या कानूनी छूट उपलब्ध न हो।
फिलहाल Ondo का कदम यह दिखाता है कि ब्लॉकचेन का इस्तेमाल केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं रह गया है। अब निजी कंपनियों, शेयरों और दूसरी वित्तीय संपत्तियों तक निवेश की पहुंच बढ़ाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर Ondo का मॉडल सफल रहता है, तो IPO से पहले निजी कंपनियों में निवेश का तरीका आने वाले वर्षों में काफी बदल सकता है।
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