वैश्विक राजनीतिक तनाव और मध्य पूर्व में बढ़ते संकट के बीच क्रिप्टो बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन हाल ही में $69,200 के स्तर से नीचे फिसल गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों की बढ़ती चिंता से जुड़ी है।
रिपोर्टों के अनुसार बिटकॉइन की कीमत एक समय लगभग $69,192 तक गिर गई। पिछले 24 घंटों में इसमें करीब 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि साप्ताहिक आधार पर भी कीमत में कमी देखी गई। इससे पहले बिटकॉइन ने पिछले सप्ताह जो बढ़त हासिल की थी उसका बड़ा हिस्सा इस गिरावट में खत्म हो गया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोलता, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचे और बिजली संयंत्रों पर हमला कर सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकता है।
ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला करता है तो क्षेत्र में अमेरिकी और उसके सहयोगियों के हितों को निशाना बनाया जा सकता है। इस तरह की बयानबाजी से वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम की भावना बढ़ गई है।
क्रिप्टो बाजार में बढ़ी अस्थिरता
बढ़ते तनाव का असर केवल बिटकॉइन तक सीमित नहीं रहा। पूरे क्रिप्टो बाजार में दबाव देखा गया और कई प्रमुख डिजिटल टोकन की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ी।
इस गिरावट के दौरान क्रिप्टो डेरिवेटिव बाजार में बड़े पैमाने पर लिक्विडेशन भी देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार करीब $299 मिलियन के ट्रेड जबरन बंद हुए, जिनमें अधिकांश लॉन्ग पोजीशन शामिल थीं। जब कीमत तेजी से गिरती है तो ऐसे लिक्विडेशन बाजार की गिरावट को और तेज कर देते हैं।
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निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हुई
विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर युद्ध या राजनीतिक संकट की आशंका बढ़ती है तो निवेशक अक्सर जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं। क्रिप्टोकरेंसी को अभी भी कई निवेशक उच्च जोखिम वाले एसेट के रूप में देखते हैं, इसलिए ऐसे समय में बिकवाली तेज हो जाती है।
इसके अलावा ऊर्जा कीमतों में संभावित उछाल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी बाजार की भावना को प्रभावित कर सकती है। यदि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर तेल बाजार से लेकर शेयर और क्रिप्टो बाजार तक दिखाई दे सकता है।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में क्रिप्टो बाजार की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। लेकिन यदि स्थिति और बिगड़ती है तो निवेशकों की सतर्कता और बढ़ सकती है।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस तरह की गिरावट अक्सर बाजार में अल्पकालिक होती है। यदि व्यापक आर्थिक स्थितियां स्थिर रहती हैं और निवेशकों का भरोसा वापस आता है तो बिटकॉइन फिर से ऊपर की ओर बढ़ सकता है।
फिलहाल बाजार की नजर मध्य पूर्व की घटनाओं और वैश्विक वित्तीय बाजारों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा गिरावट अस्थायी है या क्रिप्टो बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की शुरुआत का संकेत।
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