वैश्विक बाजारों में हाल के दिनों में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार सोने ने पिछले 43 वर्षों में अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की है। इस तेज गिरावट ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है, क्योंकि आम तौर पर वैश्विक तनाव और युद्ध के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक सप्ताह के दौरान सोने की कीमत लगभग 11 प्रतिशत तक गिर गई और यह करीब $4,488 प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। यह गिरावट 1983 के बाद से सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है।
युद्ध और बाजार की अनिश्चितता का असर
हाल के समय में मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। खासकर ईरान से जुड़े तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता ने निवेशकों की रणनीति बदल दी है।
आमतौर पर ऐसे हालात में सोने की मांग बढ़ती है क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार बाजार की प्रतिक्रिया अलग दिखाई दी। युद्ध से तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई।
महंगाई बढ़ने का मतलब यह भी है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोने जैसे ऐसे निवेश कम आकर्षक हो जाते हैं जो कोई ब्याज नहीं देते।
मजबूत डॉलर और ब्याज दरों का दबाव
विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती का भी असर पड़ा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे मांग कमजोर पड़ सकती है।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति भी बाजार को प्रभावित कर रही है। यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो निवेशक अक्सर ऐसे एसेट्स की ओर जाते हैं जो नियमित आय देते हैं, जैसे बॉन्ड या अन्य वित्तीय उपकरण।
पहले तेजी, फिर अचानक गिरावट
इस गिरावट से पहले सोने की कीमतों में तेज उछाल भी देखा गया था। जनवरी के अंत में इसकी कीमत करीब $5,500 प्रति औंस के आसपास पहुंच गई थी। लेकिन बाद में बाजार में बिकवाली बढ़ने से कीमतों में तेजी से गिरावट आई।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा बुक किया, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना।
फ्यूचर्स बाजार की भूमिका
सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट का एक कारण फ्यूचर्स बाजार की गतिविधि भी माना जा रहा है। जब कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं तो कई ट्रेडर उधार लेकर बड़ी पोजिशन लेते हैं।
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लेकिन जैसे ही बाजार दिशा बदलता है, मार्जिन कॉल के कारण उन्हें अपनी पोजिशन जल्दी बंद करनी पड़ती है। इससे बाजार में अचानक बिकवाली बढ़ जाती है और गिरावट तेज हो सकती है।
क्या सुरक्षित निवेश की छवि बदल रही है
सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता रहा है। आर्थिक संकट, युद्ध या बाजार की अनिश्चितता के समय निवेशक अक्सर सोने में पैसा लगाते हैं।
लेकिन हाल की गिरावट ने इस धारणा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या हर संकट में सोना ही सबसे सुरक्षित विकल्प रहता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक वित्तीय बाजार पहले की तुलना में अधिक जटिल हो चुके हैं, इसलिए कई बार पारंपरिक पैटर्न बदल जाते हैं।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों की दिशा आने वाले महीनों में तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें तेल की कीमतें, महंगाई का रुख और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति शामिल हैं।
अगर महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता लंबे समय तक बनी रहती है तो भविष्य में सोने की मांग फिर बढ़ सकती है। वहीं अगर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो सोने पर दबाव बना रह सकता है।
फिलहाल बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं और यह मान रहे हैं कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है।
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