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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

डार्कनेट ड्रग नेटवर्क पर NCB का एक्शन, दो आरोपी गिरफ्तार

नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (NCB) ने देशव्यापी नशीले पदार्थों के नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए दिल्ली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

डार्कनेट ड्रग नेटवर्क पर NCB का एक्शन, दो आरोपी गिरफ्तार
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देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो ने डार्कनेट के माध्यम से संचालित एक व्यापक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान के दौरान दिल्ली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर “टीम कल्कि” नामक गिरोह के जरिए पूरे देश में प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति कर रहे थे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्कर

जांच एजेंसी के अनुसार यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करों से जुड़ा हुआ था और नीदरलैंड, पोलैंड तथा जर्मनी जैसे देशों के आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क कर नशीले पदार्थ भारत मंगवाए जाते थे। बाद में इन्हें देश के विभिन्न शहरों में भेजा जाता था। 

कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किए हैं। इनमें 2338 LSD ब्लॉटर्स, 160 MDMA गोलियां, लगभग 3.6 किलोग्राम तरल MDMA, चरस तथा एम्फेटामिन जैसे मादक पदार्थ शामिल हैं। यह सामग्री 13 घरेलू पार्सलों और विदेश से आए दो पार्सलों से जब्त की गई।

जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य डार्कनेट मंचों और गुप्त संदेश सेवा माध्यमों का उपयोग कर ग्राहकों से संपर्क करते थे। ग्राहक आभासी मुद्रा के जरिए भुगतान करते थे, जिससे लेनदेन का पता लगाना मुश्किल हो जाता था। इसके बाद पार्सल सेवाओं या कूरियर के माध्यम से नशीले पदार्थ देश के अलग-अलग शहरों में भेजे जाते थे।

गिरोह जनवरी 2025 से सक्रिय

एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह जनवरी 2025 से सक्रिय था और पिछले कुछ महीनों से इसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। करीब तीन महीने तक खुफिया जानकारी जुटाने के बाद दिल्ली में विशेष अभियान चलाकर इस नेटवर्क को पकड़ने में सफलता मिली।

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जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ग्राहकों तक सीधे पहुंचने के बजाय कई मामलों में “डेड ड्रॉप” तकनीक का उपयोग करते थे। इसमें नशीले पदार्थों को पहले से तय स्थानों पर रख दिया जाता था और बाद में ग्राहक उन्हें वहां से उठा लेते थे। इस तरीके से आरोपी सीधे संपर्क से बचते थे और पहचान छिपाने में सफल रहते थे।

उच्च गुणवत्ता वाले नशीले पदार्थों की आपूर्ति

अधिकारियों के अनुसार इस गिरोह ने डार्कनेट मंचों पर अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कथित तौर पर उच्च गुणवत्ता वाले नशीले पदार्थों की आपूर्ति की और इसी वजह से वहां अच्छी प्रतिष्ठा भी बना ली थी। यह नेटवर्क देश के कई शहरों में सक्रिय ग्राहकों तक नियमित रूप से पदार्थ पहुंचा रहा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी में डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। डार्कनेट और आभासी मुद्रा के जरिए होने वाले लेनदेन को ट्रैक करना अपेक्षाकृत कठिन होता है, जिससे तस्करों को गुप्त रूप से काम करने का अवसर मिलता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने डार्कनेट और आभासी मुद्रा आधारित तस्करी की निगरानी के लिए विशेष कार्यबल भी गठित किया है।

नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो का कहना है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। एजेंसी को आशंका है कि इस नेटवर्क के देश के कई हिस्सों में संपर्क हो सकते हैं, इसलिए विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय कर कार्रवाई की जा रही है।

निष्कर्ष

डार्कनेट और आभासी मुद्रा के जरिए संचालित नशीले पदार्थों के इस नेटवर्क का भंडाफोड़ देश में बढ़ती डिजिटल तस्करी के खतरे को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी निगरानी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सख्त प्रवर्तन ही इस नए प्रकार की अपराध प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं।

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