वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin की कीमत हाल ही में $71,000 से नीचे आ गई। हालांकि कीमत में आई इस गिरावट के बावजूद कई बाजार संकेतक यह बताते हैं कि बिटकॉइन का दीर्घकालिक तेजी का रुझान अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
विश्लेषकों के अनुसार हालिया गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाओं से जुड़ी है। लेकिन बाजार के कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े अभी भी यह संकेत दे रहे हैं कि निवेशकों की मांग बनी हुई है और तेजी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
$76,000 के करीब पहुंचने के बाद आई गिरावट
हाल के कारोबारी सत्रों में बिटकॉइन ने $76,000 के आसपास का स्तर छुआ था। इसके बाद कीमत में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह $71,000 से नीचे आ गया। Bitcoin की इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारक बताए जा रहे हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव बनाया है। इसके साथ ही अमेरिका में अपेक्षा से ज्यादा मुद्रास्फीति के आंकड़े सामने आने से निवेशकों की चिंता बढ़ी। इन कारणों से जोखिम वाले एसेट्स जैसे क्रिप्टो और शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई।
तेल कीमतें और महंगाई बनी वजह
ऊर्जा बाजार में तेजी का असर निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ा है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होता है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं।
जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक अक्सर जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं। यही कारण है कि हाल के दिनों में क्रिप्टो बाजार में भी अस्थिरता देखी गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस माहौल में कई निवेशकों ने अल्पकालिक मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया।
फिर भी मजबूत दिख रहा मांग का आधार
हालांकि कीमत में गिरावट आई है, लेकिन बाजार के कुछ प्रमुख संकेतक यह बताते हैं कि तेजी की संभावना अभी बनी हुई है। खास तौर पर स्पॉट बाजार में मांग स्थिर बनी हुई है।
अमेरिका में सूचीबद्ध बिटकॉइन स्पॉट ईटीएफ में लगातार निवेश आना इस मांग को समर्थन दे रहा है। संस्थागत निवेशकों की यह दिलचस्पी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। कई विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की मांग बिटकॉइन की कीमत को गिरावट के दौरान सहारा दे सकती है।
डेरिवेटिव बाजार में भी सीमित जोखिम
डेरिवेटिव बाजार के आंकड़े भी बताते हैं कि अत्यधिक लीवरेज अभी दिखाई नहीं दे रहा है। इसका मतलब यह है कि बाजार में बड़े स्तर पर मजबूरन होने वाली लिक्विडेशन की संभावना कम है।
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जब बाजार में बहुत ज्यादा लीवरेज होता है तो कीमत गिरने पर अचानक भारी बिकवाली हो सकती है। लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसा जोखिम अपेक्षाकृत सीमित माना जा रहा है। यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ इसे सामान्य सुधार मान रहे हैं।
निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बिटकॉइन की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। अगर तेल की कीमतें स्थिर होती हैं और बाजार में जोखिम लेने की भावना वापस आती है, तो क्रिप्टो बाजार में भी तेजी लौट सकती है।
इसके अलावा संस्थागत निवेश और स्पॉट बाजार की मांग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि बड़े निवेशकों का विश्वास बना रहता है, तो गिरावट के बाद कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
अस्थिरता बनी रह सकती है
फिलहाल बाजार विशेषज्ञ यह मानते हैं कि निकट अवधि में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों की नीति और भू-राजनीतिक घटनाएं क्रिप्टो बाजार को प्रभावित करती रहेंगी।
इसके बावजूद कई विश्लेषकों का मानना है कि अगर मांग बनी रहती है तो मौजूदा गिरावट लंबी अवधि की तेजी के बीच एक सामान्य सुधार साबित हो सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार के संकेतकों पर नजर रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
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